
मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार काउंसिल (UNHRC) की बैठक के दौरान, स्विट्ज़रलैंड ने भारत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चिंता जताई।
स्विस राजनयिक माइकल मीलर ने कहा कि भारत को चाहिए कि वह अपने यहां प्रेस की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करे।
लेकिन इस पर भारत ने जो प्रतिक्रिया दी, वह बेहद कड़ी, सटीक और राजनयिक स्तर पर तीखी मानी जा रही है।
भारत की ओर से क्या कहा गया?
भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर क्षितिज त्यागी ने कहा कि:
“स्विट्ज़रलैंड को भारत की हकीकत की कोई जानकारी नहीं है और वह UNHRC जैसे मंच का समय सतही टिप्पणियों पर बर्बाद कर रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि स्विट्ज़रलैंड को पहले अपने देश में नस्लवाद, ज़ेनोफोबिया और भेदभाव जैसे मुद्दों को हल करना चाहिए। भारत ने स्विस प्रतिनिधि के बयान को “हैरान करने वाला, सतही और गलत जानकारी पर आधारित” बताया।
भारत का अपना पक्ष: “हम एक जीवंत लोकतंत्र हैं”
क्षितिज त्यागी ने कहा कि भारत एक विविध, समावेशी और बहुलवादी देश है जहाँ सभी धर्मों और समुदायों को अपनी बात कहने और जीने की पूरी आज़ादी है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि:
“भारत सदियों से बहुलवाद और सह-अस्तित्व के सिद्धांतों का पालन करता आया है। हम स्विट्ज़रलैंड की मदद करने के लिए भी तैयार हैं ताकि वह अपनी चुनौतियों से पार पा सके।”
पाकिस्तान को भी नहीं छोड़ा: “हमें उनसे कोई सीख नहीं चाहिए”
भारत ने इस मौके पर पाकिस्तान को भी कठघरे में खड़ा किया। क्षितिज त्यागी ने कहा कि:

“हमें किसी ऐसे देश से कोई उपदेश नहीं चाहिए जो आतंकवाद को फंड करता है और उनके मास्टरमाइंड को शहीद बताकर महिमामंडित करता है।”
उन्होंने 9/11 की बरसी का ज़िक्र करते हुए पुलवामा, उरी, पठानकोट, मुंबई जैसे आतंकी हमलों की याद दिलाई और कहा कि:
“दुनिया और भारत इन घटनाओं को नहीं भूलेंगे।”
स्विट्ज़रलैंड ने और किन देशों पर चिंता जताई?
स्विस राजनयिक ने भारत के अलावा तुर्की, सीरिया और सर्बिया में भी मानवाधिकारों के उल्लंघन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चिंता जताई।
लेकिन भारत के जवाब से साफ हो गया कि वह अब मानवाधिकार के नाम पर होने वाले किसी भी दोहरे मापदंड को सहन नहीं करेगा।
भारत और स्विट्ज़रलैंड के रिश्ते कैसे रहे हैं?
भारत और स्विट्ज़रलैंड के बीच 1948 से राजनयिक संबंध हैं। 2024 में दोनों देशों के बीच $26.8 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। लगभग 28,000 भारतीय मूल के लोग स्विट्ज़रलैंड में रहते हैं। पिछले 10 सालों में स्विस FDI भारत में 50% बढ़ा है।
राजनयिक संबंध मजबूत रहे हैं, लेकिन इस बार के बयान के बाद रिश्तों में कड़वाहट आ सकती है।
भारत अब सilent नहीं, diplomatic है bold
भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह अब वैश्विक मंचों पर “सुनता सबकी है लेकिन बोलता भी मजबूती से है।”
स्विट्ज़रलैंड जैसे सहयोगी देशों को भी यह समझने की जरूरत है कि भारत अब सिर्फ “लोकतंत्र की छवि” से नहीं, बल्कि “हकीकत और गरिमा” से पहचाना जाता है।
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